वो कॉलेज का पहला दिन
याद है! वो कॉलेज का पहला दिन
कभी घबराना ,कभी शरमाना,
कभी बातें बनाना,कभी ख़ामोश हो जाना,
किसी को चुपके से देखना,किसी से आँखे चुराना,
किसी को हँसाना,किसी से रूठ जाना!
हाँ! याद है वो पहला दिन,
मैं डरी सी थी,सहमी सी थी
पापा कि उंगली पकड़ी सी थी,
यहाँ कि दुनिया अलग सी थी,
मेरी दुनिया कि नक़ल न थी!
हाँ! याद है वो पहला दिन,
पुराने ख़यालों से ख़ुद को निकालना,
नये माहौल मे ख़ुद को ढालना,
कभी मायूष हुई तो कभी आई रुलाई,
पैर! हिम्मत ना हारी,ना ही बौखलाई!
हाँ! याद है वो पहला दिन
धीरे धीरे ही सही,
पैर!चलती रही ,चलती रही,
ज़िंदगी के इस भोर को,
अपनाती रही,गुनगुनाती रही.
याद है वो कॉलेज का पहला दिन.
अमू.
Posted by Amrita Bharti