क्यूं रह जाते हैं कभी शब्द अनकहे?
अनजाने से, चुप से, नि:शब्द बनके?
क्या यह प्यार नही है?
क्या प्यार सिर्फ़ शब्दों की सीमा है जो
जब जी किया, जैसे जी किया,
बनाई, तोड़ी और फिर बनाई
नही! यह प्यार नही हो सकता!
प्यार तो अनकहे से शब्द हैं,
एक मौन रिश्ता है,
जिसकी बोली नही,
यह नयनों की भाषा है,
जो दिल मे उतरती है,
अजनबी होते हुए भी,
पहचान बनती है,
अनकही होते हुए भी राज खोलती है!
यह प्यार है………………
ये अनकहे शब्द जो प्यार से प्यारे हैं,
सारे जाग से निराले हैं,
ये शब्द, ये अनकहे अनजाने शब्द,
मेरे शब्द हैं,
हाँ! मेरे अपने शब्द
अगर समझ सको तो समझो
शायद……शायद समझ भी पाओ!
क्योंकि इसके लिए भी दिल चाहिए,
भावनाएँ चाहिए, संवेदना चाहिए,
अगर तुममे है तो समझो,
और मुझे प्यार करो,
सिर्फ़ मुझे ही नही, इस सारे जाग को,
जो न तुम्हारा है, न हमारा है
लेकिन फिर भी,
एक अनकहा रिश्ता बनाता है.
अमू.
November 22, 2007 at 2:38 pm |
Lovely poem……The poem expresses the feelings of love…..its something beyond this world……After reading your poem a song sudden come into my mind….
Humne dekhi hai un aankhon ki mahakti khushbu……
hath se chukar ise riston ka ilzaam na do…..
sirf ehsaas hai ye rooh se mehsoos karo….
Pyar ko pyar hi….rahne do….koi naam do…..
The lovely lyrics……and one of my all time fav song……
November 23, 2007 at 9:24 am |
sahi hai……….
pyar me sabse jada mahatva to aankho ka hi hota hai, hai na. wahi to hai jo dil ki baat ko abhibakti deti hai, wo bhi chupke se.
December 23, 2007 at 11:26 am |
प्यार वो एहसास हैं जिसे सिर्फ महसूस किया जाता हैं ,इसके लिए किसी की आँखों की,अभिव्यक्ति की आव्य्शकता नहीं हैं !मात्र यही वह भाषा हैं जिसे बीन कहे, बीन बोले समझा जा सकता हैं !
November 20, 2008 at 5:11 pm |
bilkul sahi ushma.